करोना के बाद की डिप्रेशन से कैसे बाहर आये

 करोना,

        बिते 2 साल से बहोत परिवार ये नाम सूनकर तूट गये और बहोत सारे आज भी जुज रहे है पर ये बिमारी होणे के बाद बहोतोको मैने डिप्रेशन मे देखा आज हर एक आदमी जिंदगी की जंग लड रहा है पर क्या कभी हमने सोचा है जिंदगी क्या है आज जिंदा राहनेके लिये हर प्रयास कर रहे है पर इस जीवन पर आपणा अधिकार एक समय के लिये है हर मानव के जीवन मे जिंदगी यांनी एक सायकल के गोल पहिये की तरह है जीसने जन्म लिया है उसे जाण है इस करोना ने हर आदमी को सिखाया की तुम्हारी जिंदगी का कोई मोल नाही 

इसलीये जितना किरदार भगवान ने दिया उसे निभाकर उशी के पास जाणा है करोना काल मे डिप्रेशन मे गये लोग बाहर तभि निकाल शकते है जब  वो आपने आप को ये माने जिंदगी उसकी दी हुई है जब तक संभाळना है वो ही संभालेगा 

       एक बात याद रखीयेगा "मुष्कीले हर आदमी के जीवन मे है उसके साथ राहाणं सिखे क्यूकी बुरे के बाद ही कुछ अच्छा होता है"

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